माँ आओर वृद्धाआश्रम
अरसे के बाद भेंट;-
राजेश आओर नरेश बहुत सालक' बाद अचानक मिलैत अछि,दुनु दोस्त बहुतेक करीबी छल,एक-दोसर के देख बहुत खुशी भेल,कियाकि बहुतेक सालक बाद मुलाकात भेल रहै!!.
खुशी भेनाइ तह लाजमी छैक-
दुनु एक-दोसर के हालचाल पुछलैत,
~नरेश पुछैत छैथ राजेश सँ-कि दोस्त माँ के हाल-चाल कह, राजेश कहै छथिन की दोस्त माँ ठीक छथुन, आई हुनक जन्मदिन छियैन, अखने हम वृद्धाआश्रम सँ मिलके आइब रहल छी!!.
तू अपन कह- माँ तोरे साथ मे रहैत छथुन,राजेश बजलाह!!..
कुछेक समय चुप रहलाक बाद नरेश कहैत छैथ अपन दोस्त सँ- की दोस्त हम अखन अटेक पैघ आदमी नहि बनलौ की हम माँ के रैख सकैत छि-हमरा खुद अपन घर मे माँ रखने अछि!!...
माँ के बिना कोनो घर नहि होयत अछि-
अपन दोस्त के ई बात सुइन बहुत शर्मिंदगी महसूस भेलैक आओर ओहि दिन वृद्धाआश्रम सँ माँ के घर पर अनलैथ!!....
ज़रूर पढ़ि आओर पढ़ि के कॉमेंट करी!!..
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